EXCLUSIVE: रुबीना दिलैक बोलीं- राहुल वैद्य को पसंद नहीं थी मेरी पर्सनैलिटी, चाहती थी टॉप-2 में हों अली गोनी

इति राज 'बिग बॉस 14' का ताज जीतने के बाद रुबीना दिलैक खुशी से फूली नहीं समा रही हैं। उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि वह इस सीजन की ट्रॉफी जीत चुकी हैं। एक तरफ जहां वह जीत के जश्न में डूबी हैं तो वहीं उन्हें इस बात का मलाल भी है कि उनके दोस्त अली गोनी टॉप-4 में पहुंचकर ही बाहर हो गए। रुबीना की चाहत थी कि अली टॉप-2 में पहुंचें और स्टेज पर उनके साथ खड़े हों। बता दें कि टॉप-2 में रुबीना के अलावा राहुल वैद्य पहुंचे थे और दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी। फर्स्ट रनर-अप राहुल रहे, जबकि सेकंड रनर-अप निक्की तंबोली रहीं। रुबीना ने हाल ही नवभारत टाइम्स डॉट कॉम के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में अपने बिग बॉस के सफर के बारे में विस्तार से बात की और बताया कि क्या चीजें उनके फेवर में गईं और क्या-कुछ बदला। साथ ही उन्होंने राहुल वैद्य संग लड़ाई-झगड़ों पर भी रिऐक्ट किया और कहा कि राहुल को उनकी पर्सनैलिटी पसंद नहीं थी और इसीलिए झगड़े होते गए। यहां पढ़िए रुबीना दिलैक से हमारी सहयोगी इति राज की बातचीत के मुख्य अंश: सवाल: अपने सफर को आप कैसे देखती हैं? जब आपने इस शो में एंट्री ली थी, कभी सोचा था कि आप खिताब जीतेंगी? जवाब: जब मैंने एंट्री ली थी तो कभी सोचा नहीं था कि खिताब जीतूंगी क्योंकि मैं बिग बॉस में आई थी 'बिग बॉस' को ना जानते हुए। मुझे लगा था कि कहीं मैंने गलती तो नहीं कर दी इसमें आकर क्योंकि मैंने यह शो कभी देखा नहीं है और न ही मैं इसके बारे में जानती हूं। मेरा सफर बहुत-सी गलतियों से भरा हुआ, शिद्दतों और संघर्ष से भरा हुआ रहा है। मेरी जर्नी में आपको हर चीज नजर आएगी। मैं कह सकती हूं कि मेरी जर्नी काफी कलरफुल रही है। हर किस्म का रंग मुझे मेरी जर्नी में एक्सपीरियंस करने को मिला है। सवाल: जब आप शो के अंदर आई थीं, आपके माथे पर 'Rejected' स्टैंप लगाया गया था। एंट्री के वक्त ही ऐसा होने पर आपको तब कैसा फील हुआ था? क्या इसकी वजह से आप डाउन फील कर रही थीं? जवाब: मेरी पर्सनैलिटी का एक पहलू है कि मैं ना तो आसानी से हार मानती हूं और ना ही डीमोटिवेटेड फील करती हूं। जब रिजेक्ट का स्टैंप लगा था तो मैंने सोचा था कि मैं इससे कैसे डील करूं क्योंकि जब रिजेक्शन का स्टेंप मिला है तो मैंने सोचा कि मेरे पास खुद में सुधार करने का स्कोप है। अपने इस रिजेक्शन के स्टेंप से मैं साबित कर दूंगी कि मैं बिग बॉस की इस जर्नी में शामिल होने के काबिल हूं। मेरे लिए जितने भी रिजेक्शन और चैलेंज आते हैं, मैं उन्हें अपने लिए एक सीख के तौर पर लेती हूं कि मैं अपने-आपको को यहां से बेहतर कैसे करूं। मैं कभी ऐसा फील नहीं करती कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ? मैं ही क्यों रिजेक्ट हुई? यह सब मेरी पर्सनैलिटी में है ही नहीं। पढ़ें: सवाल: जब आप बिग बॉस में आई थीं तो कहा जाता था कि रुबीना की लड़ाई किसी कंटेस्टेंट से नहीं बल्कि बिग बॉस से है। कचरे वाले टास्क में सारे कंटेस्टेंट्स एक तरफ और आप एक तरफ थीं। क्या आपको ऐसा लगा कि शुरुआत में आपको साइडलाइन करने की कोशिश की गई थी? जवाब: मैं अपने लिए खुद स्टैंड लेती हूं। अगर कोई चीज टास्क का हिस्सा है और वह मुझे समझ में नहीं आती है तो मैं उस पर अपनी राय जरूर व्यक्त करती हूं। चूंकि गेम शो मैंने पहले देखा नहीं था। चीजें कैसे होती हैं, मुझे उसकी समझ नहीं थी। पर मेरी जो उस वक्त राय थी, मैंने वह दबाई नहीं। उसे बोलने में हिचकिचाई नहीं। मैंने अपनी राय स्पष्ट रूप से बता दी। तब सलमान सर आए और उन्होंने हमें पूरी स्थिति से अवगत कराया। फिर मैंने उसे खींचने की कोशिश नहीं की क्योंकि आखिरकार यह सब गेम का हिस्सा है। मैं किसी दबाव या हिचकिचाहट में आकर अपनी राय व्यक्त ना करूं, तो ऐसी मेरी पर्सनैलिटी बिल्कुल भी नहीं है। मैं इसे अपने लिए एक लर्निंग एक्सपीरियंस के तौर पर लेती हूं। सीखने में क्या शर्म? मांगने में क्या शर्म? मैं तो अपनी गलतियों से सीखती हूं। मैं तो खुलेआम कहती हूं कि मैं गलतियां करती हूं क्योंकि मुझे सीखना है। जिस चीज से मैं सहमत नहीं हूं, उस चीज को मुझे प्रकट करना है, वरना मैं कैसे सीख पाऊंगी? सवाल: पूरे गेम शों में अभिनव आपका सपॉर्ट सिस्टम रहे। कई बार बोला गया कि यह शो के अन्य कंटेस्टेंट्स के साथ अनफेयर था। क्या आपको ऐसा लगता है? जवाब: हम दोनों के अच्छे और बुरे पक्ष थे। हम एक कपल के तौर पर शो में आए। एक-दूसरे को मेंटल और इमोशनल सपॉर्ट था। जब आप एक कपल के तौर पर आते हो तो आपको एक-दूसरे के प्रति काफी सतर्क होना पड़ता है क्योंकि यह न सिर्फ आपकी सेल्फ रिस्पेक्ट की बात है, बल्कि आपके पार्टनर की सेल्फ रिस्पेक्ट की बात भी है। ऐसे घर में, जहां लोग एक-दूसरे पर लांछन लगाते हैं, उस माहौल में आप खुद को तो बचा ही रहे हैं, साथ में आप अपने पार्टनर को भी बचा रहे हैं। ऐसे वक्त पर यह चीज आपके खिलाफ काम करती है। तब आपसे कहा जाता है कि आपका कोई वजूद नहीं है। आपका खुद को कोई स्टैंड नहीं है। आप तो इसके सहारे आए हो। यह आपके सहारे आया है। मुझे नहीं लगता है कि यह कहीं भी बाकी कंटेस्टेंट्स के लिए अनफेयर था। यह तो बल्कि हमारे लिए स्ट्रगल बन गया था क्योंकि गेम तो खेलना था, लेकिन साथ में यह भी था कि कहीं मेरे गेम की वजह से मेरे लाइफ पार्टनर पर कोई आंच न आ जाए। तो मैं यह तो नहीं कहूंगी कि यह दूसरे कंटेस्टेंट्स के लिए अनफेयर था, पर यह जरूर कहूंगी कि हमारे लिए चैलेंज ज्यादा बढ़ गया था। दूसरे कंटेस्टेंट्स के पास सोचने के लिए यह सब नहीं था कि मेरा पार्टनर क्या बोलेगा या उसे कैसा लगेगा। उन्हें इसका स्ट्रेस नहीं था, लेकिन हम दोनों के पास यह स्ट्रेस था। हम दोनों को खुद के लिए भी लड़ना था और साथ में पार्टनर के लिए भी। यह बिल्कुल भी आसान नहीं था। जो भी कपल इस शो में अब तक आए हैं, उन्हें मेरा सलाम। मेरा तो पहला एक्सपीरियंस था कि कितना मुश्किल होता है खुद को रोकना जब आपके पार्टनर पर इतनी चीजें बरसती हैं। सवाल: अभिनव जब घर से बेघर हुए थे तो आप इमोशनली टूट गई थीं या और भी मजबूत हुईं? क्योंकि सपॉर्टर्स ने अभिनव को इसलिए वोट आउट किया था क्योंकि वो आपका गेम देखना चाहते थे। जवाब: यह कंटेस्टेंट्स की गलतफहमी थी कि वो अंत तक यह नहीं समझ पाए कि हम दोनों व्यक्तिगत तौर पर बहुत मजबूत हैं। हमें एक-दूसरे के सहारे की जरूरत नहीं है। हमें एक-दूसरे का साथ जो था, वह मायने रखा था। तो सहारा और साथ दोनों अलग-अलग चीजें हैं। जब आप एक-दूसरे का सहारा नहीं हो तो फिर कौन सी गेम? आप किस गेम की बात करे हैं कि जब अभिनव चले जाएंगे तब रुबीना की गेम स्ट्रॉन्ग होगी? आप एक दर्शक के तौर पर बताइए कि जब अभिनव गए तो मैंने क्या कुछ अलग कर दिया था जो पहले नजर नहीं आ रहा था? या एक अलग कोने में बैठ गई? मैं वैसी ही थी जैसी शुरुआत में थी। अभिनव भी वैसे ही रहते, अगर मैं नहीं होती। हम एक-दूसरे का सहारा कभी नहीं थे गेम में। हम दोनों का साथ था कि तुम हो तो तुम मुझे मेरी स्ट्रेंथ याद दिलाते हो। मैंने कभी यह नहीं कहा कि तुम हो तभी मैं जीत सकती हूं। हम एक-दूसरे पर निर्भर नहीं थे। ऐसा नहीं था कि हाए इसके बाद मेरा क्या होगा, मैं रोते-रोते रह जाऊंगी। पर्सनली और प्रफेशनली, मैं और अभिनव बहुत ही स्ट्रॉन्ग और अलग-अलग लोग हैं। मुझे लगता है कि कंटेस्टेंट्स शुरू से अंत तक भारी गलतफहमी में जीते रहे। पहले सोचा कि ये दोनों एक यूनिट आए हैं तो हमारे लिए अनफेयर है। फिर उन्होंने सोचा कि इनमें से किसी एक को निकाल दें फिर दूसरे का गेम देखेंगे। पहले कोशिशें भी बहुत हुई थीं। लोगों ने हमें इस बिनाह पर नॉमिनेट किया कि मैं अभिनव को नॉमिनेट करता हूं क्योंकि मैं रुबीना का गेम देखना चाहता हूं या अभिनव-रुबीना दोनों को नॉमिनेट करना चाहते हैं। देखा जाएगा कि दोनों में से कौन किसे बचाएगा। अभिनव की फैन फॉलोइंग अलग है और मेरी अलग। हम दोनों का व्यक्तित्व एकदम अलग है। हमें कभी भी एक-दूसरे के सहारे की जरूरत नहीं पड़ी है। सवाल: निक्की तंबोली टॉप-3 में पहुंच गईं? क्या यह एक्सपेक्टेड था क्योंकि कई लोगों का कहना था कि वह टॉप-3 में जाना डिजर्व नहीं करतीं। वह मेकर्स की वजह से पहुंची हैं। जवाब: जब शो की तकदीर जनता डिसाइड करती है तो मुझे नहीं लगता कि आप यह कह सकते हो कि जनता की इच्छा के विरुद्ध मेकर्स का योगदान था। उस लड़की ने बहुत मेहनत की है और उसे बहुत अच्छे से इस गेम की समझ है। अगर किसी की गेम बहुत अच्छी है और वह अपने दर्शकों से कनेक्ट कर पाया है और टॉप-3 में पहुंचा है तो पूरा श्रेय उसी को जाता है। यह बिल्कुल भी अनफेयर नहीं है। सवाल: राखी सावंत को लेकर जो चीजें घर के अंदर हुई थीं, क्या बाहर भी वह मनमुटाव रहेगा? जवाब: मेरे जितने भी रिश्ते खटास वाले रहे या जिनका अंत खटास पर हुआ, उन्हें मैं बिग बॉस के घर में छोड़कर आ चुकी हूं। मैं एक क्लीन स्लेट के साथ घर के अंदर गई थी और एक क्लीन स्लेट के साथ घर के बाहर आई हूं। मैंने निक्की और अली के साथ रिश्ता बनाया था और उन दोनों रिश्तों को घर के बाहर लेकर आई हूं। मैं उन रिश्तों को कायम रखूंगी और बाकी जो रिश्ते मैं पीछे छोड़ आई हूं, आगे जाकर कभी वो लोग मुझसे मिले या हमारी वापस फिर से दोस्ती हुई तो मैं इसके लिए तैयार हूं। सवाल: राहुल वैद्य के साथ झगड़ा किस बात का था? जवाब: मेरी समझ यह है कि हम दोनों की अपनी-अपनी राय है। मुझे लगता है कि कहीं न कहीं राहुल को मेरी पर्सनैलिटी पसंद नहीं आई। मैं जिस तरह की पर्सनैलिटी हूं, वह शायद राहुल को पसंद नहीं। जब आपको किसी की पर्सनैलिटी पसंद नहीं आती है तो झगड़ों की कोई वजह नहीं होती। फिर तो सामने वाले ने कुछ भी कहा तो उसे गलत ही लगता है। मैं कुछ भी कहती थी तो उसे उसमें कुछ न कुछ गलत या विरुद्ध ही नजर आता था। मुझे लगता है कि हमारे बीच जो विचारों का मतभेद था उसकी वजह से हम कभी किसी बात पर सहमत नहीं हो पाए। सवाल: अली चौथी पोजिशन पर थे, जबकि उम्मीद थी कि वह टॉप-3 में जाएंगे। आप क्या कहेंगी? जवाब: मैं अली को टॉप-2 में देख रही थी। फिनाले तक पहुंचना हम सबकी मेहनत और लगन का नतीजा है। वहां से ट्रॉफी तक जीतना, किस्मत का खेल है। आप लोगों तक अपनी बात और अपने विचार किस हद तक पहुंचा पाए हो, वह जनता के हाथों में है। वहां से आगे की जर्नी पर मैं कुछ नहीं कह सकती कि वह कितनी ठीक थी या कितनी गलत, पर मेरी दिली इच्छा था कि वह टॉप-2 तक पहुंचे। टॉप-3 में तो मैं उसे हमेशा से ही देखती थी।


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