'सुशांत पार्टी कर रहे थे, सूइसाइड कैसे कर सकते हैं?'

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में एक ओर जहां फाइनल पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है, वहीं लगातार इस बार पर जोर दे रहे हैं क‍ि सुशांत आत्‍महत्‍या नहीं कर सकते। नवभारत टाइम्‍स के साथ एक्‍सक्‍लूसिव फेसबुक चैट में उन्‍होंने कहा कि वह सुशांत को इंसाफ दिलाकर रहेंगे। शेखर ने सवाल उठाया कि जब सुशांत पार्टी कर रहे थे, प्‍लेस्‍टेशन खेल रहे थे, सुबह उठकर जूस भी पिया तो उनकी मनोदशा से साफ है कि वह सूइसाइड जैसा कदम नहीं उठा सकते। 'जिसे खुदकुशी कह रहे, वह मर्डर तो नहीं?' की मांग की है। उन्‍होंने इसके लिए एक फोरम भी बनाया है। वह कहते हैं, 'सुशांत को इंसाफ दिलाने की मुहिम में बहुत-बहुत सारे लोग मेरे साथ जुड़ रहे हैं। मेरी जो मांग है, वही सब की मांग है। सबके दिमाग में ही एक सवाल है, यह जो खुदकुशी हुई है कहीं वह मर्डर तो नहीं? 'वह जूस पी रहे थे, क्‍या सूइसाइड करना भूल गए थे?' शेखर सुमन आगे कहते हैं, 'जिस परिस्थिति में सुशांत की मौत हुई है, वह सूइसाइड करने जैसी नहीं थी। सुशांत दोस्‍तों के साथ पार्टी कर रहे थे। सुबह उठकर उन्‍होंने जूस पिया है। वह प्ले स्टेशन खेल रहे थे। जो सूइसाइड की बात कर रहे हैं, क्‍या वह यह कहना चाहते हैं कि सुशांत भूल गए थे कि उन्हें खुदकुशी करनी है और इसलिए यह सब कर रहे थे। कोई अचानक खुदकुशी नहीं करता। ऐसा नहीं होता है। आत्महत्या करने की एक पूरी प्रक्रिया होती है।' 'सीबीआई से निष्‍पक्ष जांच होनी चाहिए' शेखर सुमन ने कहा कि अब हमें विश्वास दिलाया जा रहा है कि यह खुदकुशी है। लेकिन वह इस बात को नहीं मानते। वह बस इतना चाहते हैं कि सच सामने आना चाहिए। इस मामले की सीबीआई से निष्‍पक्ष जांच होनी चाहिए। जो भी सच है वह दुनिया के सामने आना चाहिए। 'सुशांत से सूइसाइड नोट क्‍यों नहीं छोड़ा?' सुशांत संग अपनी मुलाकात और बातों को याद करते हुए शेखर सुमन कहते हैं, 'सुशांत जिस तरह के इंसान थे, वह सूइसाइड नहीं कर सकते। वह हटी थे, कर्मठ थे, वह डायरी मेंटेन करते थे। यदि मान लें कि मानसिक दबाव में आकर उन्‍होंने खुदकुशी कर भी ली है तो सूइसाइड नोट क्यों नहीं छोड़ा? वह मुखर स्‍वभाव के थे। बात करते थे। यह परिस्‍थ‍ितियां कहीं से भी सूइसाइड जैसे कदम की ओर इशारा नहीं करती हैं।' 'चाबी गायब थी, कैमरे भी चल नहीं रहे थे' बता दें कि से हुई है। हालांकि शेखर सुमन इससे इत्‍तेफाक नहीं रखते हैं। वह कहते हैं, 'सुशांत के गले में फांसी के फंदे का जो निशान है, उसे देख शंका होती है। क्या बिस्तर में लेटे-लेटे की फांसी लगाई है। घर में जो दूसरी डुप्लीकेट चाबी थी, वह भी मिसिंग थी और सीसीटीवी कैमरे के साथ भी छेड़छाड़ की बात सामने आई है। ऐसे में परिस्‍थ‍ितियों के बिनाह पर सूइसाइड की बात पर भरोसा नहीं होता।' 'सुशांत कहता था, खुद कैमरा लेकर बना लूंगा फिल्‍म' शेखर सुमन बताते हैं कि सुशांत ने उनसे कहा था कि यदि उन्‍हें फिल्मों में या टीवी में काम नहीं मिला तो वह वेब सीरीज करेंगे, यूट्यूब पर वीडियो बनाएंगे यहां तक कि सुशांत खुद कैमरा लेकर फिल्में बना लेने की बात करते थे। शेखर सुमन का कहना है कि भला ऐसा इंसान सूइसाइड क्यों करेगा? 'इंडस्‍ट्री में नेपोटिज्‍म नहीं, गैंगबाजी है' सुशांत सिंह राजपूत डिप्रेशन में थे। ऐसे में शेखर सुमन कहते हैं, 'यदि यह सूइसाइड भी है तो यह जांच का विषय है कि किन लोगों ने उसे मजबूर किया अपने जीवन को समाप्त करने के लिए। मैं आपको बता दूं कि यह नेपोटिज्म जिसने भी शुरू किया है उसकी इंग्लिश बहुत कमजोर थी। फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म जैसी चीज नहीं है, यहां पर गैंग है। जैसे अंडवर्ल्ड में गैंग होता था वैसे ही हमारी इंडस्ट्री में कुछ लोगों ने मिलकर फिल्म इंडस्ट्री को हथिया लिया है। उनका गैंग है। यही ग्रुप इंडस्ट्री को रूल करता है।' 'सुशांत से छीन ली गईं 7 फिल्‍में' फिल्‍मों और टीवी के दिग्‍गज ऐक्‍टर शेखर कहते हैं कि जब भी कोई बड़ी फिल्म बनाई जाती है तो इस 'गैंग' का दखल होता है । कौन सा हीरो-हिरोइन होगा, कौन गाना गाएगा, किसका म्यूजिक होगा हर चीज वह ग्रुप डिसाइड करता है। सुशांत के साथ भी इन लोगों ने ऐसा ही किया, उसकी 7 फिल्‍में छीन ली गईं। 'कोई बोले ना बोले, मैं चुप नहीं रहूंगा' शेखर सुमन कहते हैं, 'सुशांत ने 'काई पो छे' से फिल्‍मों में डेब्यू किया। लेकिन उसे कोई अवॉर्ड नहीं मिला। सुशांत केस को इस तरह हड़बड़ी में, जल्दबाजी में, तेजी से बंद कर देने से शक की सूई हर किसी पर जाती है। अब इस मामले में चाहे कोई बोले ना बोले, मैं चुप नहीं रहूंगा। सुशांत से मेरा एक एक्टर होने का नाता है, बिहार की मिट्टी का नाता है।' 'मैंने भी बेटा खोया है, पिता का दर्द जानता हूं' शेखर सुमन कहते हैं कि वह सुशांत के पिता के दर्द को और तड़प को समझ सकते हैं, क्‍योंकि उन्‍होंने भी एक बेटा खोया है। वह कहते हैं, 'उस समय मैं कितना अकेला तन्हा हो गया था। तबाह और बर्बाद हो गया था। मैं जिस पीड़ा से गुजरा था उस पीड़ा को समझ सकता हूं। आज सुशांत के पिता की हालत बहुत नाजुक है। सुशांत केस का सही निष्कर्ष पर पहुंचना बहुत जरूरी है।' 'यदि सूइसाइड है तो हमें यकीन दिलाइए' शेखर सुमन कहते हैं क‍ि सिर्फ फैन्‍स नहीं, देश के हर दर्शक में आज बहुत गुस्‍सा है। आक्रोश है। यदि सुशांत का केस वाकई में सूइसाइड का है तो हमें विश्वास दिलाइए, यदि हमें विश्वास हो गया कि यह एक नॉर्मल सूसाइड है तब तो ठीक है, लेकिन बात इतनी सरल और आसान नहीं है।


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